हड़प्पा

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हड़प्पा मुहर
Harappa Seals

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सिन्ध में मोहनजोदाड़ो में हड़प्पा संस्कृति के अवशेष

अन्नागार का अवशेष

यहाँ पर 6:6 की दो पंक्तियों में निर्मित कुल बारह कक्षों वाले एक अन्नागार का अवशेष प्राप्त हुआ हैं, जिनमें प्रत्येक का आकार 50x20 मी. का है, जिनका कुल क्षेत्रफल 2,745 वर्ग मीटर से अधिक है। हड़प्पा से प्रान्त अन्नागार नगरमढ़ी के बाहर रावी नदी के निकट स्थित थे। हड़प्पा के ‘एफ‘ टीले में पकी हुई ईटों से निर्मित 18 वृत्ताकार चबूतरे मिले हैं। इन चबूतरों में ईटों को खड़े रूप में जोड़ा गया है। प्रत्येक चबूतरे का व्यास 3.20 मी. है। हर चबूतरे में सम्भवतः ओखली लगाने के लिए छेद था। इन चबूतरों के छेदों में राख, जले हुए गेहूँ तथा जौं के दाने एवं भूसा के तिनके मिले है। 'मार्टीमर ह्रीलर' का अनुमान है कि इन चबूतरों का उपयोग अनाज पीसने के लिए किया जाता रहा होगा। श्रमिक आवास के रूप में विकसित 15 मकानों की दो पंक्तियां मिली हैं जिनमें उत्तरी पंक्ति में सात एवं दक्षिणी पंक्ति में 8 मकानों के अवशेष प्राप्त हुए, प्रत्येक मकान का आकार लगभग 17x7.5 मी. का है। प्रत्येक गृह में कमरे तथा आंगन होते थे। इनमें मोहनजोदाड़ो के ग्रहों की भांति कुएं नहीं मिले हैं। श्रमिक आवास के नज़दीक ही क़रीब 14 भट्टों और धातु बनाने की एक मूषा (Crucible) के अवशेष मिले हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ से प्राप्त कुछ महत्त्वपूर्ण अवशेष- एक बर्तन पर बना मछुआरे का चित्र, शंख का बना बैल, पीतल का बना इक्का, ईटों के वृत्ताकार चबूतरे जिनका उपयोग संभवतः फ़सल को दाबने में किया जाता था, साथ ही गेहूँ तथा जौ के दानों के अवशेष भी मिले हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता में स्थित एक कुआँ और स्नान घर

प्राप्त क़ब्रिस्तान

हड़प्पा के सामान्य आवास क्षेत्र के दक्षिण में एक ऐसा क़ब्रिस्तान स्थित है जिसे ‘समाधि आर-37‘ नाम दिया गया है। यहाँ पर प्रारम्भ में 'माधोस्वरूप वत्स' ने उत्खनन कराया था, बाद में 1946 में ह्वीलर ने भी यहाँ पर उत्खनन कराया था। यहाँ पर खुदाई से कुल 57 शवाधान पाए गए हैं। शव प्रायः उत्तर-दक्षिण दिशा में दफ़नाए जाते थे जिनमें सिर उत्तर की ओर होता था। एक क़ब्र में लकड़ी के ताबूत में लाश को रखकर यहाँ दफनाया गया था। 12 शवाधानों से 'कांस्य दर्पण' भी पाए गए हैं। एक सुरमा लगाने की सलाई, एक से सीपी की चम्मच एवं कुछ अन्यय से पत्थर के फलक (ब्लेड) पाए गए हैं। हड़प्पा में सन् 1934 में एक अन्य समाधि मिली थी जिसे समाधि 'एच' नाम दिया गया था। इसका सम्बंध सिन्धु सभ्यता के बाद के काल से था।


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